उत्तर प्रदेशनोएडा

सांड गिरा तो खुली पोल… ग्रेटर नोएडा में खुले नाले बने जानलेवा जाल, अब क्या बड़े हादसे का इंतजार?

ग्रेटर नोएडा के गामा-2 में करीब 10 फीट गहरे खुले नाले में सांड गिर गया। दो घंटे की मशक्कत से बचाया गया। वर्षों की शिकायतों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल हैं।

Greater Noida News: आधुनिक और सुनियोजित शहर के तौर पर पहचान रखने वाले ग्रेटर नोएडा में खुले और जर्जर नाले अब लोगों के लिए परेशानी के साथ बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इन नालों को ढकने या सुरक्षित करने की मांग पिछले कई वर्षों से उठाई जा रही है, लेकिन हालात में खास बदलाव नहीं आया। ताजा मामला गामा-2 इलाके का है, जहां करीब 10 फीट गहरे खुले नाले में एक सांड गिर गया। घटना की सूचना मिलने के बाद प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंची। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद सांड को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

हादसे के बाद फिर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने खुले नाले की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि कई जगह नाले खुले हैं और इनके आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग भी नहीं है। ऐसे में पैदल चलने वाले लोगों, बच्चों और वाहन चालकों के लिए खतरा बना रहता है। लोगों के मुताबिक, अधिकारियों को कई बार खुले नालों की जानकारी देकर इन्हें ढकने या मजबूत सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की गई है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

इंसानों पर भी खतरा

खुले नालों से जुड़ी चिंता केवल बेजुबान जानवरों तक सीमित नहीं है। पहले भी ग्रेटर नोएडा में खुले या असुरक्षित नालों के आसपास हादसों की घटनाएं सामने आती रही हैं। जनवरी 2026 में परी चौक के पास एक कार खुले नाले में गिर गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, इस हादसे में स्टेशन मास्टर भरत भाटी की मौत हुई थी। उस स्थान पर बैरिकेडिंग और दिशा-सूचक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे।

बारिश में और बढ़ जाता है खतरा

जुलाई 2026 में गामा-1 और बीटा-1 के बीच एक जर्जर नाले का हिस्सा भारी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था। स्थानीय लोगों ने तब भी लंबे समय से शिकायत किए जाने की बात कही थी। अब गामा-2 की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि शहर के खुले और जर्जर नालों को लेकर स्थायी कार्रवाई कब होगी।

बड़े हादसे का इंतजार?

स्थानीय लोगों की मांग है कि प्राधिकरण पूरे शहर में खुले नालों का सर्वे कराए, संवेदनशील स्थानों पर मजबूत बैरिकेडिंग और कवर लगाए और जरूरत के मुताबिक स्थायी निर्माण कराया जाए। सवाल यही है की क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करेगा या खुले नालों की समस्या पर समय रहते कार्रवाई होगी?

ये भी पढ़ें: 21 दिन से धरना 240 किसानों पर FIR… नोएडा डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन की मांग ने बढ़ाया तनाव

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Translate »